तो क्या चुनावी मुद्दा बनेगा “बेरोजगारी” या फिर वही पुराना “खेला” होगा?

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दिल्ली। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि अगर देश की सत्ता हथियानी है तो फिर उसके लिए सबसे बड़ी जनसंख्या वाले प्रदेश उत्तर प्रदेश पर राज करना अनिवार्य है। इतिहास गवाह है कि देश की गद्दी पर उसी ने राज किया है जिसने यूपी को जीता है। अब बारी है उसी प्रदेश में विधानसभा चुनाव की, 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव होना है जिसको देखते हुए सूबे में सभी पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी है।

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आये दिन राजनीतिक दलों द्वारा जनता को रिझाने के किये कई कार्यक्रम भी किये जा रहे हैं। लेकिन यहां सवाल यह है कि जनता को रिझाने के लिए ये तमाम पार्टियां बस बड़े बड़े जुमलेबाजी करेंगी या फिर उनके आशाओं और किये वादों पर खरे उतरेंगी। बात अगर मौजूदा सत्ताधारियों की करें तो सच्चाई किसी से छिपी नहीं है।

इन्होंने वादे तो बहुत किये मगर जमीनी असलियत क्या है ये जब आप जमीन पर उतर कर जनता से बात करेंगे तो सच्चाई पता चल जाएगी। सत्ता में आने से पहले बीजेपी ने तमाम वादे किए थे जिनमें बेरोजगारी प्रमुख मुद्दा था मगर प्रदेश से बेरोजगारी हटी नहीं बल्कि प्रदेश में कई गुना बढ़ गयी। हालांकि सरकार और उनके लोगों की माने तो पूरे प्रदेश में रोजगार की गंगा बह रही है और हर युवाओं के पास रोजगार है शायद इसी कारण ये सरकार इस प्रमुख मुद्दे को भुलाकर बाकी अन्य मुद्दों को महत्वपूर्ण मानती है।

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अब जबकि चुनाव नजदीक है और कई विपक्षी दल रोजगार और महंगाई को मुद्दा बनाकर मैदान में उतर चुकी हैं तो देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी विकास वाला मुद्दा लेकर ही मैदान में उतरेगी या फिर कुछ और। हालांकि कई निजी चैंनलों को दिए इंटरव्यू में खुद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बीजेपी दुबारा सत्ता में आएगी वो भी 300+ सीटों के साथ।

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