रवि किशन ने भोजपुरी सिनेमा में बढ़ती अश्लीलता के खिलाफ उठाई आवाज, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

343
Advertisement

गोरखपुर से सांसद व भोजपुरी फिल्म अभिनेता रवि किशन ने भोजपुरी फिल्म और गानों के माध्यम से समाज में फैलाई जा रही अश्लीलता पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

Advertisement

रवि किशन ने कहा है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि भोजपुरी फ़िल्म उद्योग को समृद्ध बनाने में गानों का महत्वपूर्ण योगदान है। लेकिन किसी भी सभ्य समाज में अश्लीलता स्वीकार नहीं की जा सकती है। इसके लिए कानून बनाया जाना चाहिए।

हालांकि सांसद बनने के बाद लगातार वे भोजपुरी के उत्थान के लिए प्रयास कर रहे हैं। लोकसभा में वह इकलौते सांसद हैं जिनके द्वारा भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लिए एक ग़ैर-सरकारी सदस्य का विधेयक भी संसद में पेश किया है।

Advertisement

प्रकाश जावड़ेकर को भी लिखा पत्र
इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, संस्कृति मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, और सीएम योगी आदित्यनाथ, बिहार के सीएम नीतीश कुमार व कला संस्कृति एवं युवा विभाग मंत्री बिहार आलोक रंजन को पत्र लिखा है।

रवि किशन ने पत्र के माध्यम से भोजपुरी फ़िल्म और गानों के माध्यम समाज में फैलाई जा रही अश्लीलता पर रोक लगाए जाने के लिए व कठोर क़ानून बनाएं जाने की मांग की है।रवि किशन ने पूर्व में बन चुकी फ़िल्म और अश्लील गानों पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की पुरजोर वकालत की।

युवा पीढ़ी पर पड़ रहा बुरा प्रभाव
रवि किशन ने कहा कि भोजपुरी क्षेत्र का आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महात्मा गांधी का चंपारण से सत्याग्रह की शुरुआत, भोजपुर की धरती के महान रण बांकुरे बाबू वीर कुंवर सिंह ने आज़ादी की लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान, भोजपुरी भाषा के लोक नाटककार भीखारी ठाकुर और लोक गायक महेंद्र मिश्र की ख्याति देश- विदेश सर्वत्र फैली हुई है।

Advertisement

रवि किशन ने कहा, ”मैं स्वयं भी पूर्वांचल के जौनपुर का निवासी हूं, हमारे प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की उत्पत्ति भोजपुरी माटी में रही है। भोजपुरी भाषा में अनेकानेक फ़िल्में बनी हैं, जो आज भी हमारे कानों में गूंजती हैं।

लेकिन पिछले कुछ दशक में भोजपुरी फ़िल्म और विशेषकर उसके गानों में काफ़ी गिरावट आयी हैं। आज का भोजपुरी फ़िल्म और गाने अश्लीलता का पर्याय बन गया है। इससे युवा पीढ़ी के कोमल मन-मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।”

Advertisement
Advertisement

Advertisement