हिंदू धर्म में कितना खास है अक्षय तृतीया का महत्व, जानें आचार्य ऋषि दिक्षित से

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गोरखपुर। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है इस दिन स्नान, दान ,जप ,होम ,स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं यह सब अक्षय हो जाता हैं उसका कभी क्षरण नहीं होता है।

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इसे दिन ऋषि जमदग्नि पत्नी माता रेणुका के पुत्र भगवान परशुराम का जन्म दिवस भी मनाया जाता है इसीलिए इसको परशुराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है इस तिथि को भगवान नर नारायण, ह्यग्रीव, व भगवान परशुराम का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है इस तिथि के दिन से किसी भी मनोकामना हेतु साधक यज्ञ आरंभ कर सकता है एवं लक्ष्मी नारायण का पूजन करने का भी विधान है।

घड़ा से भरा हुआ जल अन्न, स्वर्ण का दान करना चाहिए तथा जिसके पास कुछ भी उपलब्ध ना हो वह व्यक्ति ज्वौ से भगवान विष्णु का पूजा तथा ज्वौ से ही हवन करने से मनोरथ पूर्ण होता है इस दिन से किसान कृषि का कार्य आरम्भ करते हैं विद्यार्थियों के लिए विशेष यह मंत्र हैं इस मन्त्र का प्रयोग करके लाभ पा सकते हैं (ऊँ श्रीं ह्रीं हसौः हूँ फट् नील सरस्वत्यै स्वाहा ) विद्यार्थी गण इस मंत्र का 108 बार नित्य जब करे तो निश्चित ही सुलभता से विद्या प्राप्ति होती है एवं विद्यार्थियों के सभी मनोकामना पूर्ण होता है ।

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अक्षय तृतीया के दिन से 13 दिन तक लगातार हनुमान चालीसा एवं हनुमान बाहुक का पाठ करके गुगुल, घी,लोहबान, पीला सरसो, गुरुच, से हवन करने सारी व्याधियों से निजात मिलता हैं।

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