क्षेत्र में कोई जानता तक नहीं और बने बैठे हैं युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऐसे कैसे पार्टी बनेगी मजबूत?

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मोदी के प्रचंड बहुमत के बाद कांग्रेस पार्टी में कुछ भी ठीक नही चल रहा है। एक तरफ राहुल गांधी हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने पर अड़े हुए है तो वहीं युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव चंद्र यादव से कोई सवाल पूछ दे रहा है उसे वह पार्टी से निष्कासित कर दे रहे हैं। दरअसल केशव चंद्र यादव सलेमपुर के रहने वाले हैं और उत्तरप्रदेश में जनाधार बढ़ाने के लिए उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया लेकिन उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से देश तो छोड़िए उनके गृह जनपद में भी कांग्रेस मजबूत नहीं हो पाई। आलम यह है कि लोग उनको जानते ही नही और उनको पैराशूट वाला नेता कहा जाता है।

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2019 के लोकसभा चुनाव में जहां कांग्रेस की स्थिति बेहद खराब रही और सलेमपुर में तो पार्टी सुहलदेव समाज पार्टी से भी नीचे चली गई जबकि कांग्रेसी दिग्गज पूर्व सांसद राजेश मिश्रा यहां से चुनाव लड़ रहे थे और युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवचंद्र यादव का संसदीय क्षेत्र है और यही कारण है कि कांग्रेसी कार्यकर्ता केशव से सवाल करने लगे है। युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अभिनीत उपाध्याय ने केशव के ट्विटर पर यह सवाल पूछ लिया कि आपके बूथ नम्बर 105 पर कितना वोट मिला है तो उसके तुरंत बाद अभिनीत को केशव यादव के कहने पर अनुसाशनात्मक कारवाई करते हुए प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने निलंबित कर दिया।

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अभिनीत पाठक
अभिनीत पाठक

अभिनीत बताते है कि केशव यादव को विधानसभा में भी कोई नहीं जानता उनके बूथ पर 51 वोट मिला है और 2014 के चुनाव में 10 से 20 वोट के करीब था। अभिनीत बताते है कि केशव ने युवा कांग्रेस को मजबूत करने के लिए कुछ नहीं किया जबकि उनके अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी प्रदेश सहित सलेमपुर में बेहद कमजोर हुई ।अभिनीत के दादा जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्वनाथ तिवारी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंद्रा गांधी के साथ देवरहवा बाबा का दर्शन की थी।

अभिनीत का आरोप है कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने प्रियंका गांधी को सलेमपुर से चुनाव लड़ाने की मांग की थी और यहीं से केशव चंद्र यादव खार खाए हुए थे क्योंकि वह खुद चुनाव लड़ना चाहते थे। अब अभिनीत की बात में कितनी सच्चाई है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन अगर ट्विटर पर केशव के बूथ को लेकर सवाल पूछना और इसपर एक जुझारू कार्यकर्ता को निष्कासित करना ये एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

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