इस खूबसूरत चेहरे की दुश्मन बनी थी दुनिया, लाखों हैं दीवाने लेकिन नहीं जानते ये सच्चाई

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आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में यूपी से जिस खूबसूरत चेहरे पर दांव खेला है, उसके बारे में हर कोई जानना चाहता है। हर कोई इंटरनेट पर भवानी मां के बारे में जानने के लिए उत्सुक है, लेकिन पूरी जानकारी उन्हें कहीं भी नहीं मिल पा रही है। लेकिन आज GORAKHPUR LIVE आपको बताएगा कि आखिर भवानी मां से शबनम कैसे बनी आम आदमी पार्टी की प्रयागराज से लोकसभा उम्मीदवार।

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साभार-गूगल

सबसे पहले आपको बता देते हैं कि आखिरी भवानी मां कौन है। दरअसल, भवानी मां किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर है। जिसे आम आदमी पार्टी ने प्रयागराज से लोकसभा का टिकट दिया है। ऐसा नहीं है कि टिकट पाने के बाद से ही भवानी मां की चर्चाएं हुई होंगी। इनकी चर्चाएं प्रयागराज में लगे कुंभ मेले के दौरान से ही है।

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किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर के बारे में कुछ अहम जानकारियां

  • अखाड़े की भवानी मां का असली नाम भवानी नाथ वाल्मीकि है। वो 17 नवंबर 1972 को दिल्ली के बेहद चर्चित चाणक्यपुरी इलाके में गरीब परिवार में जन्मी।
  • भवानी मां ने बताया कि वह कुल 8 भाई बहन थे और गरीब परिवार होने के कारण उन सब का लालन पालन अच्छे से नहीं हो पाता था। भवानी मां उस समय महज 13 साल की थी जब उन्हें किन्नर होने का पता चला।
  • समाज की कुरीतियों का सामना करते-करते परेशान होकर एक दिन भवानी ने अपना घर छोड़ दिया। उम्र बढ़ने के साथ भवानी को जीवन यापन में समस्या तो आ रही थी, लेकिन उन्होंने प्रकृति के इस निर्णय को स्वीकार किया।
साभार-गूगल

भवानी के जीवन में बड़ा परिवर्तन तब हुआ जब साल 2012 में भवानी ने इस्लाम धर्म अपनाने का फैसला कर लिया। भवानी के पहले गुरु जारी नूरी की प्रेरणा से वह इस्लाम धर्म कबूल कर नयी जिंदगी शुरू करने आगे बढ़ी। भावनी ने अपना नाम बदलकर शबनम रख लिया और कई सालों तक यही पहचान ही भवानी को दुनिया दिखाती रही।

रोजा और नियम कानून का पालन करते हुये 2012 में भवानी ने बतौर शबनम हज की यात्रा की और दुनिया को अपने नजरिये से देखना शुरू कर दिया। लेकिन इस्लाम धर्म अपनाने के बाद वह खुद को उसके अनुरूप अभी भी पूरी तरह नहीं ढाल पा रही थीं।

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इस्लाम धर्म अपनाने के 3 साल बाद हुई घरवापसी

  • मन में सनातन संस्कृति के प्रति आस्था ने उन्हें वापस हिंदू धर्म में लौटने को मजबूर किया। यही वह समय था जब भवानी की मुलाकात लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से हुई और भवानी की घर वापसी का दौर शुरू हुआ।
  • 2015 में वह वापस हिंदू धर्म में लौट आईं। साल 2015 में लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के साथ मिलकर भवानी मां ने किन्नर अखाड़े की स्थापना की और यहीं से एक नये अध्याय की शुरुआत हो गई।
  • साल 2016 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में वह धर्मगुरु बनी और किन्नरों के जीवन सुधार से लेकर समाज को दिशा देने की पहल उन्होंने शुरू की।
साभार-गूगल

साल 2017 में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने भवानी मां को साल 2017 में महामंडलेश्वर की उपाधि दी। किन्नर अखाड़े में भवानी मां का कद दूसरे स्थान पर आता है। सिंहस्थ कुंभ के बाद किन्नर अखाड़े का कद बढ़ना शुरू हुआ जो प्रयागराज के कुंभ में अपने विशालतम आकार में आ गया। लोगों ने किन्नर अखाड़े को हाथों हाथ लिया और मान सम्मान से लेकर संत के तौर पर जन स्वीकार्यकता भी दे दी। लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई तो किन्नर अखाड़े ने भी लड़ने का फैसला किया। लेकिन किसी भी बड़े दल ने ना तो लक्ष्मी नारायण और ना ही भवानी मां को टिकट दिया। जिसके बाद भवानी मां ने आम आदमी पार्टी से संपर्क किया और अब उनके टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लडेंगीं।

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