आरक्षण देकर सवर्णों को लुभा रही या भुना रही मोदी सरकार?

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नीतीश गुप्ता

गोरखपुर।

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लोकसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है सभी राजनीतिक पार्टियों में हलचल भी तेज होने लगी है। कभी एक दूसरे विपक्षी दल सपा बसपा भी एक हो गए है तो वहीं आरक्षण के खिलाफ बात करने वाली पार्टी बीजेपी भी खुद आरक्षण के पक्ष में कल एक बड़ा फैसला सुनाई। केंद्र की मोदी सरकार ने कल एक बड़ा फैसला सुनाया जिसमें ये कहा गया कि सवर्णों को 10% आरक्षण मिलेगा यानी अभी तक जो आरक्षण SC,ST और OBC वाले पाते थे अब वो आरक्षण सामान्य वर्ग यानी सवर्ण समाज के लोगों को भी मिलेगा। मगर सरकार द्वारा लाये गए इस सवर्ण आरक्षण पर कहीं ना कहीं सवाल उठने भी लाज़मी है और सवाल वो कि-

1-आखिर केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव से ही पहले सवर्ण आरक्षण का फैसला क्यों ली?

2- सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम कहीं पांच राज्यों में मिली हार के कारण तो नहीं?

3- सरकार को पता था कि अन्य वर्ग को दिए जा रहे आरक्षण से एक विशेष वर्ग नाराज़ है या पार्टी का वोट कट रहा है तो कहीं ये फैसला उस कारण तो नहीं लिया गया?

4- मोदी सरकार सवर्ण आरक्षण देकर सवर्णों को लुभाने के प्रयास में है या भुनाने के ?

आपको बताते चले केंद्र सरकार ने सवर्णों को 10% आरक्षण देने का फैसला तो किया है मगर उसके लिए कुछ मापदंड भी रखे है और साथ ही कुछ डाक्यूमेंट्स भी दिखाने होंगे तभी जा कर आपको 10% आरक्षण मिलेगा।

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केंद्र सरकार ने अपने फैसले में कहा है कि सवर्ण आरक्षण का लाभ उन्ही को मिलेगा जिनकी सालाना आय 8 लाख से कम हो। यहीं नहीं अगर आपको इसका लाभ लेना है तो आपके पास ये सब डाक्यूमेंट्स होने चाहिए-

1- आपको आरक्षण लेने के लिए इनकम सर्टिफिकेट दिखाना होगा।

2- आप को आरक्षण लेने के लिए बीपीएल कार्ड दिखाना होगा।

3- आप को आरक्षण लेने के लिए पैन कार्ड दिखाना होगा।

4- आप को आरक्षण देने के लिए जाति प्रमाण पत्र दिखाना होगा।

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